लिंग भेद: मूल कारण / Gender Discrimination: Root Cause
- gaurav99a5
- Jun 5, 2021
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आज सभ्य समाज का हर व्यक्ति महिलाओ की इज़्ज़त करता है, हमारे घरो मे भी हम अपने बच्चो (लडको) को यही सिखाते है। समाज मे आज हर जगह महिलाओ के मान सम्मान के बारे मे बात की जाती है, फिर भी लिंग भेद (Gender discrimination) हमारी सोसायटी मे आम क्यो है?
हम तो हमारे बच्चो को सही संस्कार दे रहे है, और तो और लडकियो को भी समान रूप से आगे बढने के अवसर दिए जा रहे है। फिर चाहे वह पढाई हो, कामकाज हो या नौकरी। इन सभी के बाद भी महिलाओ की स्थिती बराबर की तो दूर अभी भी संघर्ष के दौर मे ही है।
फिर इसके पीछे क्या कारण हो सकता है, क्या बात है कि पारिवारिक स्तर से लेकर सरकारी योजनाओ मे महिलाओ के लिए अलग से विचार एवम ध्यान रखने के बाद भी स्थिती मे आवश्यक सुधार नही अया है।
कारण के लिए हम इस लेख के आरम्भ मे चलते है, जहाँ हमने पारिवारिक संस्कारो मे महिलाओ के सम्मान की बात कही थी, और शायद समस्या की जड यही है, पर कैसे ?
शायद हम सिर्फ सम्मान पर ही रूक जाते है! क्योंकि किसी महिला को सम्मान देने मे समाज (महिला एवम पुरूष दोनो) को कोई एफर्ट नही करना पडता। अगर इससे आगे की बात की जाए तो यदि जब कोई महिला (पत्नि/ बहु/ बेटी/ बहन) अपने पारम्परिक रूढिवादी किरदार से बाहर निकलती है तो सबसे पहले इन किरदारो के काउंटरपार्ट्स ही अपने रोल मे परिवर्तन करने मे सहज रहते है।
हमारे घरो मे जन्म से ही सबके रोल तय होते है। आज भी घर के पुरूष घर के कामो मे महिलाओ (माँ/बहन/ बेटी/ पत्नि) का ‘हाथ बटाते’ है, यह हाथ बटाना ही उन्हे उस काम को Disown करवाता है। They truly don’t own the work or we can say the role they have to play in today’s time to give women a free physical and mental space to do something, to make their way to make their place in the world.
हमारे घरो मे दिए गए संस्कार ही अपर्याप्त है, तौर तरीके जो हम अपने ही घर की महिलओ के साथ अपनाते है, सही नही है। तो फिर बाहर की दुनिया की स्थिती तो हम समझ ही सकते है।
जब तक काम मे हाथ बटाना, काम को अपनाने मे नही बदलता, तब तक बदलाव लाना सम्भव नही है।
गौरव भार्गव



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